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प्राचीन समय की बात है
ये वो समय था जब मनुष्य खेती करना नहीं जानते थे मनुष्य अभी जानवरों पर ही निर्भर थे फिर भी मानवो ने प्रगति कर ली थी और वे पहले के मुकाबले आरामदायक जीवन व्यतीत कर रहे थे यह वह समय था जब हमारे पूर्वजो ने धन की देवी के रूप में देवी लक्ष्मी कों जान लिया था
वे देवी लक्ष्मी की पूजा बड़े ध्यान से करते थे लेकिन धन के आ जाने से मानवो में उच्च नीच का भेद भाव आ चूका था अचानक एक बार एक महामारी फ़ैल गयी पशुओ में फैली इस महामारी के कारण सारे पशु मारे गए चूँकि धन के रूप में उस समय मानवो के पास सिर्फ पशु ही थे अतः धन के नष्ट हो जाने से मानवो का जिन्दगी में कष्टों का दौर शुरु हो गया सभी मानव किसी तरह से धन की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश करने लगे लेकिन देवी लक्ष्मी को न मानना था और वो नहीं मानी तब ऋषि मुनियों के द्वारा सबके पलक भगवन विष्णु की उपासना की गयी भगवन विष्णु प्रसन्न हो गए ऋषियों ने भगवन विष्णु से कहा
वे देवी लक्ष्मी की पूजा बड़े ध्यान से करते थे लेकिन धन के आ जाने से मानवो में उच्च नीच का भेद भाव आ चूका था अचानक एक बार एक महामारी फ़ैल गयी पशुओ में फैली इस महामारी के कारण सारे पशु मारे गए चूँकि धन के रूप में उस समय मानवो के पास सिर्फ पशु ही थे अतः धन के नष्ट हो जाने से मानवो का जिन्दगी में कष्टों का दौर शुरु हो गया सभी मानव किसी तरह से धन की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश करने लगे लेकिन देवी लक्ष्मी को न मानना था और वो नहीं मानी तब ऋषि मुनियों के द्वारा सबके पलक भगवन विष्णु की उपासना की गयी भगवन विष्णु प्रसन्न हो गए ऋषियों ने भगवन विष्णु से कहा
हे भगवन हमारे संचित श्रम यानि हमारे धन के नष्ट हो जाने से हमारा जीवन जीना मुश्किल हो गया है कृपया करके आप कोई ऐसा उपाय बताये जिससे हम अपने श्रम को हमेशा के लिए बचा करके रख सके तथा देवी लक्ष्मी हम पर पुनः प्रसन्न हो जाये
ऋषियों के वचन को सुनकर भगवन विष्णु बोले वत्स देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का आखिरी उपाय तो स्वर्ण से श्री यन्त्र का निर्माण करना ही है स्वर्ण में संचित किया गया मानव श्रम सदा सुरक्षित रह सकता है क्यों की स्वर्ण से बना श्री यन्त्र देवी लक्ष्मी का घर है इतना कह कर सबके पालक भगवन विष्णु अंतर्ध्यान हो गए
तभी से मानवो ने स्वर्ण को धन के रूप में स्वर्ण को मान्यता दी और अपने गुणों के कारण स्वर्ण अपनी यह मान्यता अभी तक बचाए हुए है
धन क्या है ?
धन हमारा संचित श्रम है हम जो आवश्यकता से अधिक मेहनत करते है वो धन के रूप में संचित होता है